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सत्यता का ज्ञान – डॉ कंचन जैन

शिवानी जैन एडवोकेट की रिपोर्ट

सत्यता का ज्ञान – डॉ कंचन जैन

 

एक गांव में एक ग्रामीण व्यापारी रहता था। वह अपने पुत्र से बहुत ही परेशान रहता था। ना तो वह पढ़ता और ना ही कोई अन्य कार्य करता।

वह व्यापारी सबसे कहता कि उसका पुत्र उसकी बात नहीं मानता। उसने न जाने कितने व्यक्तियों के बताए हुए उपाय भी किए एवं अनेक व्यक्तियों ने उसके पुत्र को समझाया भी मगर वह टस से मस नहीं था।

इस समस्या का समाधान लेने दूर से आए एक महात्मा के पास वह व्यापारी गया और उसने अपनी सारी समस्या उस महात्मा को बताई। महात्मा उसकी समस्या को सुनकर जोर-जोर से हंसने लगे। उन्होंने कहा- कि कल प्रातः काल ही दो घड़े पानी लेकर दोनों हाथों में आना। वह व्यापारी यह सोचकर बहुत ही खुश हुआ कि उसे उसकी समस्या का समाधान कल सुबह मिल जाएगा। वह दो घड़े खरीद कर घर ले गया और अपनी चारपाई के पास में दोनों घड़े रख लिए रात भर इस चिंता में कहीं भोर ना हो जाए और वह सोता रह जाए, कहीं महात्मा पलायन न कर जाएं । इसी असमंजस की स्थिति में रात पर वह सोया भी नहीं। और सुबह की पहली किरण निकलते ही वह दोनों घड़ों को भरकर महात्मा के पास पहुंचा महात्मा ने दोनों घड़ों में पानी देखा और उस व्यापारी से बोले कि मेरी कुटिया में जाओ और अंदर से एक तेल का पात्र और नमक का पात्र ले आओ। उस व्यापारी ने ऐसा ही किया। मन में प्रसन्नता का भाव लेकर वह गया और तेल और नमक का पात्र ले आया। महात्मा ने एक घड़े में थोड़ा तेल डाल दिया और दूसरे घड़े में थोड़ा नमक डाल दिया। उस व्यापारी से कहा तुम मेरे पास खड़े रहो। वह व्यक्ति भी आशा भाव से महात्मा के पास खड़ा रहा। थोड़ी देर बाद महात्मा ने कहा अब जरा इन घड़ों को देखो। जिस घड़े में तेल डाला था। वह तेल घड़े पर तैर रहा है । और जिस घड़े में नमक डाला था, वह पानी में घुल गया है। तब महात्मा ने कहा- तुमने सबके बताए उपाय किए परंतु निष्कर्ष नहीं निकला । अब इन दोनों घड़ों में ही तुम्हारा समाधान है।

पहला तुम्हें किसी पर अपनी बात थोपने का प्रयास नहीं करना चाहिए। यह तेल की सीख है।

दूसरा तुम्हें अपने पुत्र के साथ घुल-मिल कर उसकी समस्या को समझने का प्रयास करना चाहिए।

महात्मा की बात सुन वह व्यापारी यकायक खड़ा हुआ और महात्मा को प्रणाम कर बोला मेरे समझ में यह सत्यता का ज्ञान आ गया है।

शिक्षा- अपनी बात और अपने विचार किसी पर थोपने का प्रयास नहीं करना चाहिए।

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